Wednesday, May 3, 2017

यायावर की डायरी -1

यहाँ शायद ही कोई ऐसा होगा जो घूमने-फिरने का शौकीन न हो । ट्रैवलिंग एक तरह का आर्ट है जिसकी एबीसीडी फैमिली ट्रिप से शुरू होती है । फैमिली के साथ तीर्थ-स्थान पर भ्रमण ट्रैवलिंग की एलकेजी है । एक उत्तर भारतीय के लिए अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और वैष्णो-देवी आइडल फैमिली ट्रिप होते है । फिर स्कूल-कालेज टूर मे जयपुर, लखनऊ, खजुराहो, पटना और कलकत्ता जैसे ट्रिप मे हमे कुछ जानने सीखने का हुनर मिलता है । दोस्तो के साथ गोवा, जैसलमेर मुम्बई पाण्डुचेरी जैसी भिन्न सांस्कृतिक डेस्टिनेशन पे मौज मस्ती हमारे घूमने के भूख को जगाती है । ये ऐसी जगहे है जहाँ से घूम कर आपकी ट्रैवलिंग की क्षमता, प्लेजर को बढ़ाती है इसी रास्ते से होके आप बैकपैकर्स बनते हैं । आज की व्यस्त लाइफस्टाइल मे घूमना फिरना थोड़ा खर्चीला और टाइम टेकिंग हो जाता है इस बात को समझते हुए ट्रैवलिंग का एक बाजार खड़ा हो गया है । अब तमाम ट्रैवलिंग एजेंसिया खुल गयी है जो आपके बजट मे पैकेज उपलब्ध करवाती है लेकिन इसकी लिमिटेशन एक बड़ी खामी है । मेरे मुताबिक एक अच्छे ट्रैवलर को इन पैकजो से बचना चाहिए । आमतौर पर लोग ट्रैवलिंग को खर्चीला शौक मानते हैं बेशक ये है लेकिन इतना भी नही जितना हम सोचते हैं । यायावरी मैनेजमेंट और शौक के बीच की कला है जिसमे पारंगत होने मे थोड़ा वक्त लगता है तो अगर आप एक ट्रैवलर बनना चाहते है तो मैं आपको बताऊँगा किस तरह आप कम से कम खर्चे मे ट्रैवलिंग का पूरा आनंद ले सकते हैं ।

1- ट्रैवलिंग मे हर तरह की तकलीफो से जूझने को मेंटली प्रिप्रेयर्ड रहिए मसलन, भीड़-भाड़ और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते वक्त नखरे न कीजिए ।

2- अगर आप कई जगहो की ट्रिप पे निकले हैं लम्बी दूरी के लिए रात का सफर कीजिए, इससे आप होटल के खर्चे से बचेंगे ।

3- बड़े रेस्टोरेंट के बजाए लोकल फूड का स्वाद लीजिए ये आपका बजट भी मैंटेन रखेगा और आप लोकल कल्चर को अच्छे से समझ पाएंगे ।

4- होटल लेते वक्त जम कर मोलभाव कीजिए ।

5- सामान कम से कम रखिए  ।

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