Saturday, May 26, 2018

यायावर की डायरी 2 (स्वर्गद्वारीखाल-नेपाल)




सैर कर दुनिया की गाफिल जिंदगानी फिर कहाँ
जिंदगानी गर रही तो नौजवानी फिर कहाँ

अगर आप अभी युवा है मतलब 30 साल से कम के हैं, एडवेंचर-पसंद हैं और बियर ग्रिल का शो आपका पसंदीदा शो है तो ये लेख आपके ही लिए है । अगर आप भी बियर ग्रिल की तरह रोमांचक लेकिन सुरक्षित तरीके से ऊँचे-ऊँचे पहाड़ो को पैदल पार करना चाहते हैं, नदियों में जंपिंग-जपाक करना चाहते हैं और विपरीत परिस्थितियो में जिंदगी के लिए सरवाइव करने का जज़्बा परखना चाहते हैं तो मैं आपको बताऊँगा ऐसी जगह के बारे मे जिसके बारे में कहते हैं कि जो एक बार वहाँ जाता है वो दुबारा नही जाना चाहता । और उसके बारे मे ऐसा गलत नही कहा जाता ।



कहाँ

गरीबो का विदेश नेपाल गर्मियो में वक्त गुजारने का सबसे सस्ता सुलभ और ठिकाऊ विकल्प है और अगर यहाँ ट्रैकिंग करने को मिल जाए तो क्या कहनें । नेपाल के दांग जिले में एक छोटा सा टाउन है घोराही । यहीं से हमारी ट्रेकिंग पहाड़ो को पार करते और गिनते हुए शुरू होती है । इस ट्रेकिंग की खास बात ये है कि ये पूरी तरह से प्रकृति से घिरा है । इंसानी दख़ल यहाँ उस रूप मे नही है जैसा कि हम बाकी ट्रैकिंग स्पाट पे देखते हैं । कोई गाइड नही, कोई टूरिस्ट स्पाट नही, ठहरने के लिए कोई होटल नही, कोई रेस्टोरेंट नही । यहाँ तक कि फोन का नेटवर्क भी नही । एक तरह से ये समझिए कि आप पन्द्रहवीं शताब्दी में कोई जंगल घूमने निकले हैं । हालाँकि इसके अपने मज़े हैं । एक बात मैं साफ कर दूँ कि अगर आपको अपने शरीर पे हन्ड्रेड पर्सेन्ट भरोसा हो तभी आप यहाँ की ट्रेकिंग के बारे सोचें ।
बाकी सरवाइव करने भर का तीन दिन का राशन आपको साथ ले जाना होगा हालाँकि मिनलर वाटर की कमी नही है । नदी और सोतों का स्वच्छ, शीतल, मीठा जल सदैव उपलब्ध हैं ।
यहाँ दुनियावी झमेले से निकल पर सुकूँन और संघर्ष दोनो को एक साथ जिया जा सकता है ।

इस जगह मैं दो बार पहले भी आ चुका हूँ पहली बार 2013 और दूसरी बार 2016 । दोनो बार बहुत सी चीजें जानने सीखने को मिली । जंगली वनस्पतियाँ जिनमे टिंबूर और बिच्चू घास और उसकी दवा सबसे खास है साथ ही अगर आप मई-जून मे जाएंगे तो चिऊरी फल भी खाने को मिल जाएगा ।




कब जाएँ ?

वैसे तो यहाँ मानसून सीजन छोड़कर कभी भी जाया जा सकता है लेकिन सबसे मुफीद वक्त होता है अप्रैल से जून । जुलाई मे बारिश की वजह से नदी मे बहाव तेज हो जाता है जिससे नदी पार करने मे दिक्कत आ सकती है वहीं बरसात मे पहाड़ो पर जोंक बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाते है जो आपके पैरो मे चिकप कर तब तक खून पीते रहेंगे जबतक खुद से चार-छः गुना न हो जाए । आपको पता भी नही चलेगा और आपका खून बहता रहेगा । जंगल मे मेडिकल सुविधा उपलब्ध नही है इसलिए मेडिकल किट साथ ले जाना होगा । लैंड स्लाइड और फिसलन भी बरसात मे अन्य समस्या हो सकती है ।


कैसे पहुँचे ?

यहाँ आने के लिए कई सारे रूट हैं लेकिन ट्रैकिंग के नजरिए से आपको कृष्णानगर बार्डर से इंटर करना होगा । हिन्दुस्तान के किसी भी कोने से आप लखनऊ आसानी से पहुँच सकते हैं यहाँ से ट्रेन मार्ग से गोण्डा आना होगा जोकि तकरीबन 100 किलोमीटर के आसपास है । फिर गोण्डा से बस या पैसेन्जर ट्रेन से बढ़नी पहुँचना होता है यहीं बार्डर क्रास करके घोराही के लिए डायरेक्ट बस मिल जाएगी । अगर आप नये ट्रैकर हैं तो बिना उस आदमी को साथ लिए बिना वहाँ न जाएँ जो उस जगह से पूरी तरह वाकिफ हो ।


 कहाँ ठहरें ?

अगर घोराही पहुँचने मे शाम हो जाएग तो वहाँ बहुत से होटल और लाॅज मिल जांएगे । ध्यान रहे ट्रैकिंग सुबह के वक्त से शुरूआत करना सबसे अच्छा होता है । उसके कई सारे कारण हैं । ट्रैकिंग शुरू होने के बाद तीन दिन तक आपको कोई होटल नही मिलेगा । कुछ छोटे छोटे हाल्ट जरूर मिलेंगे जहाँ आप चाऊ-चाऊ या चाय ले सकते हैं । राशन और बाकी सामान अपने एक्सपर्ट से पूछ कर पैक करें  ।

       Lette box team 

क्या-क्या खतरे हैं

बात जंगल में ट्रैकिंग करने की है तो डरना लाजिमी है । जंगल के नाम पर आपको जंगली जानवर का कोई खतरा नही है । किसी वक्त वहाँ भालू रहा करते थे लेकिन अब काफी वर्षो से उन्हे वहाँ नही देखा गया है । जंगली जानवर नही हैं इसका मतलब ये नही कि और खतरे नही हैं । ट्रैकिंग लम्बा है इसलिए डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है ट्रैकिंग के आखिरी दिन ठंड इतनी होती है कि जून के महीने मे भी आपको कंबल-रजाई ओढ़नी पड़ेगी । पानी इतना ढंडा होता है कि हाइपोथर्मिया होने का भी खतरा होता है । जंगल में यूँ तो कोई रास्ता नही है । अंदाज लगाते हुए जाना होता है ऐसे में नये ट्रैकर के रास्ता भूलकर भटक जाने का खतरा होता ।

फिसलन और नदी मे गिरने का खतरा भी रहता है ।




जब इतनी दिक्कते है तो जाए हीं क्यो ?

ये उन लोगो के वाज़िब सवाल हैं जो एडवेन्चरस नही हैं । होमो सेपियंस के माइग्रेशन और सरवाइवल जज़्बे को समझने के लिए, प्रकृति से खुद को जोड़ने और नज़ारो का लुत्फ उठाने के लिए अगर इतना पसीना बहाना पड़े तो सौदा बुरा नही है । इस ट्रेकिंग में आपको बहुत से हिस्से ऐसे मिलेंगे जो इंसानी पहुँच से अभी दूर रह गयें हैं । अगर आप एडवेन्चरस के साथ-साथ सोशल भी है तो यहाँ आपको इंसानों की जिजीविषा को देखने समझने का एक अलग नज़रिया भी मिलेगा ।




स्पेशल नोट:

ब्लाॅग पढ़कर हीरो न बनें । कभी भी जाएँ तो एक्सपर्ट की सलाह लेके जाएँ ।ये ट्रैकिंग उन लोगो के लिए बिल्कुल भी नही है जो जरा सी मेहनत मे थक जाते हैं । हार्ट पेशेंट, मोटे और आराम पसंद लोग इसे ट्राय न करें क्योकि एक बार ट्रेकिंग शुरू करने के बाद आपके पास लौटने का मौका नही होगा । इससे आपके साथ-साथ आपके टीम मेट्स को भी दिक्कत हो सकती है ।

7 comments:

  1. छोटा खपत और विज्जू को बुलाओ एक बार फिर से चला जाये अबकी अपना फर्जी भी चलेगा ....

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    1. विज्जू ने कान पकड़ लिए अब नही जाएगा वो । बाकी फर्जी मेरे सामने आएगा नही 😅😅

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  2. Waaahhhh chhote... gajab likhe

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    1. शुक्रिया भाई 😊

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    2. बेहतरीन सफर था दोस्त , मन करता है और चल जाये कभी....लेकिन अभी नहीं।

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  3. बहुत शानदार सफर और उससे कहीं शानदार प्रस्तुति भइया👌👌

    एक बात जो दिल को छू जाने वाली थी कि "कुछ वक्त से भालू नही देखे गए" यकीनन हम आज इन सबका लुफ्त उठा सकते है लेकिन जिस प्रकार हम प्रकृति का दोहन कर रहे है न जाने आने वाली पीढ़ियों को ये विरासत मिले की नही😑

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