Thursday, August 6, 2020

ट्राॅयारण - अनटोल्ड स्टोरी ऑफ फाॅरगेटेन राम

 राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है, राम भक्तों में हर्षोल्लास का माहौल हैं । पूरा देश राममय है, होना भी चाहिए आखिर पाँच सौ वर्षों तक इंतजार किया है हिन्दू जनता ने, लेकिन राम की कहानी तो इससे कहीं ज्यादा पुरानी हैं । ऐतिहासिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करें तो हमें बहुत से अनकहे, अनसुने फैक्ट देखने सुनने को मिलते हैं ।

किसी पंडा-पुजारी से अगर पूछा जाए कि राम का जन्म कब हुआ था तो उनका जवाब त्रेता युग से आगे नही बढ़ पाता । त्रेता युग कब था इसकी भी कोई ऐतिहासिक पुष्टि नही होती है । मोटा मोटी तौर पे देखें तो हिन्दू सभ्यता का श्रीगणेश वैदिक सभ्यता से होता है । ऐसा माना जाता है कि सिंधु सभ्यता के पतन के बाद आर्यों ने वैदिक सभ्यता की नींव रखी । और तभी से सतयुग का प्रारंभ माना जाता है । सतयुग के बाद त्रेता कब आया इसकी भी कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नही है । साहित्यिक और पुरातात्विक विश्लेषण के आधार पर माना जाता है कि पन्द्रहवी शताब्दी ईसापूर्व से नौवी शताब्दी ईसा पूर्व के बीच ॠगवेद की रचना हुई । और ध्यान देने वाली बात ये है कि किसी भी वेद में राम या अयोध्या का वर्णन नही मिलता

तो फिर राम कथा की शुरूआत कहाँ से हुई ? क्या सचमुच राम अयोध्या के राजा थे भी या ये सिर्फ किसी कवि की कल्पना थी ?
राम कथा की शुरूआत कहाँ से हुई इसकी प्रेरणा कहाँ से मिली आज हम इसपर भी चर्चा करेंगे ।
कुल मिलाकर राम कथा का सार क्या है ?
"एक राजकुमार अपनी पत्नी और भाई के साथ एक विशाल राज्य का स्वामी होता है एक दिन एक अन्य राजा राजकुमार की पत्नी का हरण कर समंदर पार ले जाता है फिर दोनो भाई सुग्रीव, हनुमान, जामवंत जैसे महान योद्धा के साथ मिलकर एक विशाल सेना का गठन कर संमदर पार करते हैं और और राजा की हत्या करके रानी को वापस लाते हें और सुशासन की स्थापना करते हैं पूरा राज्य दोनो भाई और रानी का हर्षोल्लास से स्वागत करते हैं"
इस घटना को महर्षि वाल्मिकी संस्कृत में सूत्रबद्ध करके 'रामायण' महाकाव्य लिखते हैं जिससे प्रेरित होकर तुलसीदास 'राम चरित मानस' रचते हैं । साथ ही, जगह जगह इसका मंचन करते हैं, जिससे रामकथा आम जनमानस को बहुत ही प्रभावित करती है और राम जन जन के ह्रदय में स्थान बनाते हैं ।
अब चलिए एक और कहानी सुनाते हैं ।
आज से लगभग 3100 साल पहले जब उत्तर-पश्चिम भारत में वेद रचे जा रहे थे तब आधुनिक तुर्की में एक प्रसिद्ध घटना हुई । जिसे 'फाॅल ऑफ ट्राॅय' नाम से जाना गया । ये घटना उस समय बहुत चर्चित रही और ग्रीसवासी इसे बहुत ही गर्व और सम्मान के साथ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाते रहे । गौरतलब है कि लोग उस समय साहित्य लेखन के बजाय साहित्य श्रुति पर ज्यादा भरोसा किया करते थे । यूरोप में इस घटना के लगभग 400-500 साल बाद का काल 'होमर' काल के नाम से जाना जाता है । होमर एक नेत्रहीन कवि थे जिन्होने 'फाॅल ऑफ ट्राॅय' को सूत्रबद्ध करने का कार्य किया और 'इलियड' और 'ओडिसी' महाकाव्य की रचना की । जर्मनी के हेनरी श्लीमान बचपन में अपने पिता से ट्राॅय की कहानियाँ सुना करते थे उन्होने बचपन में ही निश्चय किया कि वो ट्राॅय की खोज करेंगे, बड़े होकर हेनरी ने खुद से किया वादा निभाया और तुर्की सरकार से इजाजत लेकर उन्होने ट्राॅय को खोज निकाला । और होमर की इलियड की सत्यता साबित करते हुए उसे फिर से प्रासंगिक बनाने में अतुलनीय योगदान दिया ।
होमर की इन कृतियों के आधार पर तात्कालीन समाज की पुर्नव्याख्या हो सकी है । होमर की इस ग्रीक कथा के
अनुसार 3100 साल पहले वर्तमान पश्चिमी तुर्की के समुद्र के किनारे एक सुंदर नगर था, नाम था ट्राॅय । ट्राय एशिया, अफ्रीका और यूरोप के सीमा पर बसा व्यापारिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण नगर था । ट्राॅय पूर्वी देशों विशेषतः भारत और यूरोप के मध्य व्यापार का मध्य केन्द्र था । व्यापार के जरिए उसने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर ली थी । सामाजिक स्थिति भी बहुत अच्छी थी । दास व्यवस्था नही थी, बंदा बंदा खुशहाल था । इस वजह से ग्रीस की नज़र ट्राॅय के व्यपार पर लगी थी । ट्राॅय के राजा प्रायम के दो बेटे थे हेक्टर और पेरिस । एक बार ट्राॅय का राजकुमार पेरिस व्यापार के लिए ग्रीस जाता है जहाँ उसकी मुलाकात स्पार्टा के राजा मेलेनीज और उसकी पत्नी हेलेन से होती है । हेलेन उस वक्त सम्पूर्ण ग्रीस की सबसे खूबसूरत महिला थी । पेरिस हेलेन पर मोहित हो जाता है जबकि रूढ़िवाद से ग्रसित ग्रीस की बंदिशों में रहने वाली हेलेन जब ट्राॅय के स्वच्छंदता के किस्से सुनती है तो उसके मन में ट्राॅयवासी होने का ख्वाब जग जाता है । उसी वक्त स्पार्टा राजा मेलेनीज़ के पिता का देहांत हो जाता है जो कि अपने बड़े बेटे और मेसीडोन के राजा एगोमेम्नेन के साथ रहते थे । मेलेनीज अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए मीसोडोन चला जाता है । मौका पाकर हेलेन और पेरिस ट्राॅय भाग आते 
ट्राॅय में जब ये बात सबको पता चलती है तो प्रायम और हेक्टर सहित सभी पेरिस पर हेलेन को वापस करने का दबाव डालते हैं । उधर स्पार्टा में ये बात फैल जाती है कि ट्राॅय का राजकुमार स्पार्टा की रानी का हरण कर ले गया है । गुस्से में आगबबूला हेलेन का पति मेलेनीज अपने भाई एगोमेम्नेन से मदद माँगता है एगोमेम्नेन की नज़र बहुत दिनों से ट्राय के व्यापार पर थी । उसने अपने भाई को मदद देने का आश्वासन दिया और सम्पूर्ण ग्रीस को संगठित कर एक विशाल नौसेना बनाई जिसमें एकीलीज़ और ओडिशियस जैसे महान योद्धा शामिल थे । सागर को पारकर ग्रीस की सेना ट्राॅय के गढ़ के सामने डेरा डाल देती है । दोनो भाई एक आखिरी बार प्रायम के सामने समझौता का प्रस्ताव रखते हैं । प्रस्ताव सभा में प्रायम से हेलेन को वापस करने के साथ साथ ट्राॅय का सालाना रेवेन्यू भी मांगा जाता है जिसे प्रायम ठुकरा देते हैं और बात युद्ध तक आ जाती है । 10 साल युद्ध होता है और राजा प्रायम, राजकुमार हेक्टर और पेरिस इस युद्ध में मारे जाते हैं । कुल मिलाकर कहानी का सारांश ये है कि

"एक राजकुमार एक महारानी का अपहरण करके ले जाता है और फिर दो भाई समंदर लांघ कर उस राजा का समस्त वैभव नष्ट कर महारानी को वापस ले जाते हैं । और राज्य की प्रजा सबका हर्षोल्लास से स्वागत करती है"
चाय पी हुई कप में अगर दूध डाल दिया जाए तब भी चाय की महक रह ही जाती है ऐसा ही कुछ इलियड और रामायण के साथ हुआ है ।
मसलन इलियड में एकिलीज जब हेक्टर की हत्या करता है तो उसे रथ में बांधकर घसीटता है और उसकी लाश को ट्रायवासियों को देने से मना कर देता है, जबकि रामायण मे मेघनाथ की हत्या करने के बाद राम की सेना मेघनाथ को रथ मे बांध कर घुमाने का प्रस्ताव रखती है और लाश को चील कौवे को खिलाने की बात कहती ।
इलियड में एकिलीज को दैवी पुत्र माना गया है जिसे कोई भी हरा नही सकता था ठीक वैसे ही जैसे हनुमान को देव पुत्र माना गया है और उन्हे हराना किसी के लिए मुमकिन नही ।
इलियड के क्लाईमेक्स में ट्रॉय के किले को जला कर भस्म कर दिया जाता है जैसा कि रामायण में हम लंका दहन पढ़ते हैं ।
इलियड के ओडिशियस को महान सेनानायक माना गया है जिसकी तुलना सुग्रीव से की जा सकती है । होमर ने ओडिशियस के लिए अलग से ओडिशी महाकाव्य की रचना की । मानव इतिहास में इलियड और ओडिशी को सबसे प्राचीनतम महाकाव्य माना जाता है ऐसे में ऐतिहासिक विश्लेषण के आधार पर आप खुद तय कीजिए रामकथा का उदगम कहाँ से हुआ है ?
ये सत्य है कि दोनो कथाओं में निर्विवाद रूप से समानता पाई गयी है । यदि रामकथा इकत्तीस सौ साल पुराने इलियड से प्राचीन होती तो वेदों मे इसका जिक्र अवश्य मिलता ।
यहाँ पर कुछ गिने चुने समानताओं का जिक्र किया गया है, बेहतर समझ के लिए रामानंद सागर कृत 'रामायण' और ब्रेड पिट अभिनीत 'ट्राॅय' अथवा नेटफ्लिक्स पर एवलेबल 'फाॅल ऑफ ट्राॅय' वेब सीरीज देखिए ।
इलियड और रामायण में जो बुनियादी फर्क है वो ये है कि इलियड में घटनाओं को अपेक्षाकृत काफी रियलिस्टिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है जबकि रामायण में अतिशयोक्ति का प्रयोग दिल खोल कर किया गया है ।
रामायण रचना में और भी बहुत से फैक्टर ने अपना प्रभाव डाला है ।
क्रोनोलाॅजी देखें तो वैदिक सभ्यता एलीट ब्राह्मणों की सभ्यता थी जिसमे उच्च कुलों में विचारों का आदान प्रदान संस्कृत भाषा में होता था । वैदिक कर्मकांड आम जनमानस से बहुत दूर थी बाद में महावीर, बुद्ध और गोशाल जैसे महापुरूषों ने आम जनमानस की भाषा में धर्म की नयी परिभाषाए गढ़ी जिन्हें जनता ने खुशी खुशी आत्मसात किया । शैव धर्मानुयायी अशोक के बौद्ध बनने के बाद के काल में बौद्ध धर्म अपने चरम पर पहुँच चुका था ठीक उसी वक्त वैदिक धर्म अपना स्वरूप बदल कर भागवत धर्म का रूप ले चुका था, यज्ञ, हवन कर्मकांड की जगह मूर्तिया और मंदिर, आरती और भक्ति ने ली लिया । बौद्ध के जातक कथाओं से प्रेरणा लेकर तमाम पुराण, उपनिषदों की रचना की गयी । संभवतः ग्रीस से व्यापार के जरिए इलियड और ओडिशियस भारत में प्रचलित हुए हो, साथ ही बौद्ध धर्म के ग्रंथ 'दशरथ जातक' के मिले जुले प्रेरणा से रामकथा की शुरूआत हुई हो । सच्चाई क्या है ये शोध का विषय हैं लेकिन जब धर्म पर शोध की बात आती है तो आस्था का नाम देकर उसपर ताला लगा दिया जाता है जैसा कि बाबरी मस्जिद की खुदाई के दौरान बौद्ध साम्रगियों के मिलने पर पुरातात्विक शोध को बंद कर दिया गया ।
खैर, कंवर्टेड बौद्ध अब हिन्दु बहुसंख्यक है और उनकी आस्था पर सवाल नही उठाया जा सकता, राम मंदिर बन रहा है, दिवाली मनाई जानी चाहिए, लोग खुश रहें, बस यही मायने रखता है ।
रामभक्तों को बहुत बहुत बधाई । हिन्दुस्तान को राम मंदिर मिल गया लेकिन
दुखद है कि मेलेनीज और हेलेन का कोई मंदिर नही बन सका ।

9 comments:

  1. Great ... Always best...

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  2. इंटरेस्टिंग पर राम की व्याख्या और प्रमाणिकता को और ज़ोर देना था ✍️
    बाँकी शानदार छोटे 👌

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  3. वेबुनियादी लेख है, रत्ती भार सत्य नहीं है इसमें, अगर ऐसा है तो रामायण के हज़ारों प्रमाण है जैसा राम सेतु, लंका, राम मंदिर अवशेष

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    1. राम सेतु ऑस्ट्रेलिया में भी मिल जाएंगे आपको

      आयोध्या का एक नाम साकेत भी है ऐसा इतिहासकार बताते है।
      खुदाई में बौद्ध अवशेष भी मिले है।

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  4. बकवास .. अधर्मी इंसान ..जिन लोगो का कोई वजूद नहीं उन लोगो से भगवान राम की तुलना कर रहे हो...

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